- पशुओं में खुर पका मुँह पका बीमारी से बचाने हेतु टीके लगवायें ।
- दुधारू पशुओं को उचित मात्रा में पौष्टिक हरा चारा बरसीम 20 से 25 किलोग्राम
प्रतिदिन खिलायें ।
- पशुओं में खुरपका मुँहपका बीमारी से बचाने हेतु टीके लगवायें ।
- भैंसों के नवजात पड़े एवं पड़ियों में अंत परजीवी नाशक दवा पिपराज़िन 30 मिलीलीटर 1 महीने के अंतराल पर 3 महीने तक दें ।
- नवजात बछड़े/ बछिया एवं
पड़े / पडियों के जन्म से 3 दिन तक शरीर के
भार का 10% खींज प्रतिदिन पिलायें । खींज
पिलाने से नवजात बच्चों में रोगों से लड़ने की शक्ति आती है ।
- गेहूँ के सूखे भूसे की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये उसे यूरिया द्वारा
उपचारित करें. इसके लिये
पहले 4 किलोग्राम यूरिया को 60 लीटर पानी में घोल लें तथा साफ, पक्के
अथवा गोबर से लिपाई किये हुये समतल ज़मीन पर समान रूप से 4 से 6 इंच की भूसे की परत फैलायें अब यूरिया के घोल की आधी मात्रा इस पर छिडकें तथा पाँचा या दाँताली द्वारा
भूसे को बार-बार पलट दें । इसके पश्चात् शेष
भूसे को भी यूरिया मिश्रित भूसे पर छिड़कें । इस उपचारित भूसे को अच्छी तरह से दबा दें तथा एक प्लास्टिक
की चादर से अच्छी तरह ढक दें जिससे हवा अंदर ना जा सके । तीन सप्ताह बाद भूसे का रंग सुनहरा हो जायेगा
जिसे जानवरों को खिलाने से एक तिहाई संतुलित आहार की मात्रा कम की जा सकती है
।
- ब्याने के 2 महीने
पश्चात गाय एवं भैंसों को प्राकृतिक अथवा कृतिम गर्भाधान द्वारा गर्भित करायें तत्पश्चात उचित समय पर गर्भ परीक्षण करायें
।
- पशुओं को हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने
हेतु खेतों में बरसीम की किस्म जवाहर बरसीम -1 किस्म बोयें तथा 10 से 15 दिन के नियमित अंतराल पर इसकी सिंचाई करें ।
- आज़ोला उत्पादन तकनीकी सीख कर पशुओं के आहार में आज़ोला शामिल करें और
पशु आहार की गुणवत्ता बढ़ायें ।
- हरे चारे की अधिकता की स्थिति में ’’साईलेज’’ बनायें ।
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Monday, 11 November 2024
अक्टूबर माह (1 से 15 तक) की पशुपालन संबंधी अनुशंसा
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