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Saturday, 9 November 2024

अनाज की पाक्षिक अनुशंसा दिनांक 16 अक्टूबर से 31 अक्टूबर हेतु

देरी से बोई गई धान हेतु :

  • आवश्यकता पड़ने पर वराह काम होने पर सिंचाई की उचित व्यवस्था करें ।
  • धान में सफेद व भूरे रंग की मक्खी दिखाई देने पर फिप्रोनिल 5% की 300 मिली मात्रा प्रति एकड की दर से छिडकाव करें .
  • धान में अगर पुरानी पत्ती ऊपर से कत्थई रंग ले कर सूख रही हो तो 0:0:50 एन.पी.के. खाद का छिड़काव 1 किलो  प्रति एकड़  की दर से 200 लीटर पानी मे घोल कर करें अथवा 15 किलो म्युरेट ऑफ पोटाश  का भुरकाव करे।
  • धान में तना बेधक कीट एवं दीमक के प्रबंधन के लिए फिप्रोनिल 0.3 जी. आर. या कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी. की 10 किग्रा/एकड. प्रयोग करें।
  • धान की फसल में तना बेधक, पत्ती लपेट, चिड्डा एवं दीमक कीट की समस्या आने पर इसके नियत्रंण के लिए थायोमेथोक्जाम + क्लोरेन्ट्रानिलोप्रोल की मिश्रित दवा की 1 किग्रा मात्रा को 6 किग्रा रेत या यूरिया में मिलाकर प्रति एकड की दर से  भुरकाव करें । कीटों के उचित नियंत्रण हेतु दवाओं के प्रयोग के समय खेत में पर्याप्त नमी होना चाहिए। 
  • धान में अगर पत्तियाँ  ऊपर से सूख रहीं है और फिर पत्ती के दोनों किनारों में पहले इसी लक्षण को प्रदर्शित करते हुए पूरी पत्ती बाद में पीली सफेद हो जाये तो यह जीवाणु पत्ती झुलसा रोग है। इसके निंयत्रण हेतु खेत का पानी निकाल दें एवं यूरिया खाद का प्रयोग अभी न करें, साथ ही कापर आक्सीक्लोराइ 3 ग्रा/ली. एवं स्टेप्टोसाइक्लीन 2.5 ग्रा/10 ली को एक साथ घोल कर छिड़काव करें या कासुगामाइसिन 1.5 ग्रा/ली. पानी की दर से छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त इस रोग के नियंत्रण हेतु 20 किलो कच्चा गोबर 100 ली. पानी में घोलकर प्रयोग करने से लाभ मिलता है।
  • धान में इस समय शीथ ब्लाइट रोग देखने को मिल रहा है यह फफूँद जनित रोग जमीन की सतह से जुड़े पौध वाले भाग पहले गहरे भूरे धब्बों के रूप में दिखता है, एवं धीरे-धीरे पूरे तने में फैल जाता है यह रोग अक्सर धान जब गलेथ में आनी शुरू होती है तब आता है, इस रोग के नियंत्रण हेतु निम्नलिखित फफँदनाशी में से किसी एक का प्रयोग करें। ऐजोक्सीस्ट्रोबिन 23 प्रतिशत का 1 एम. एल. /ली. (200 एम. एल. /एकड़ ) या हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत का 2 एम. एल. /ली. (400 एम. एल. /एकड़ ) या वैलिडामाइसिन 3 प्रतिशत का 2 एम. एल. /ली. (400 एम. एल. /एकड़ ) या मिटोमिनोस्ट्रोबिन 20 प्रतिशत का 1 एम. एल. /ली. (200 एम. एल. /एकड़ ) की दर से प्रयोग करें।
  • किसान भाइयों गत वर्ष धान में आभासी कण्डवा रोग की अधिकता देखी गई थी जिसमें वाली में दानों के स्थान पर गुलाबी संरचना बन कर उभर आई थी, इस रोग का प्रबंधन हमें शुरूआत से ही करना है अर्थात जैसे ही धान ग्लेथ में आये तब प्रोपीफोनाजोल 25 प्रतिशत फफँूदनाशी 1 एम. एल./ली. (200एम. एल./एकड़) की दर से छिड़काव करें एवं जब बलिया 50 प्रतिशत फूल की अवस्था में हो तब टेबुकोनाजोल 25.9 प्रतिशत का 1.25 एम. एल./ली. (250एम. एल./एकड़) अथवा ट्राइसाइक्लाजोल 75 प्रतिशत 0.6 ग्रा./ली. (120ग्रा./एकड़) अथवा हेक्जाकोनाजोल 5 प्रतिशत का 2 एम. एल./ली. (400एम. एल./एकड़) की दर से प्रयोग करें।
  • धान में पुरानी पत्तियाँ अगर ऊपर से पीली भूरी हो रही हों तो यह पोटाश की कमी के लक्षण हो सकते हैं इस दशा में 0: 0: 50, एन. पी. के. का छिड़काव 1 किलो/ 200 ली. पानी/एकड़ की दर से करें या 15 कि. म्यूरेट आफ पोटाश खाद प्रति एकड़ भुरकाव करें।
  • धान की पत्तियों के दोनों किनारे आपस में चिपके हो और पत्ती सफेद रंग की दिखे तो यह पत्ती लपेटक कीट की समस्या है इसके निदान हेतु लेम्डासाहिलोथ्रिन + थायोमिथाक्जाम 10 एम. एल /15 ली. पानी अथवा फिप्रोनिल 5 प्रतिशत 2 मिली./ली  पानी में  मिलाकर (400 एम. एल./एकड़) की दर से प्रयोग करें।
  • धान के पौधों में अगर मध्य भाग सूख रहा हो और खींचने में आसानी से निकल आये तो यह पीला तना छेदक कीट की समस्या है इसके नियंत्रण हेतु फिप्रोनिल 0.6 दानेदार 04 किला/एकड़ प्रयोग करें । 

Saturday, 11 July 2020

पाक्षिक सुझाव (1 से 15 जुलाई के बीच तकनीकी सलाह)


धान - सीधी बोनी पद्धति

1          कम से मध्यम अवधि की किस्मों का चयन करें जैसे- आई आर. 64, एम. टी. यू. 1010, पी. एस. 5,  पी. एस. 7, जे. आर. 206 इत्यादि ।
2.         बीजोपचार - ट्राइसायक्लाजोल 1.5 ग्रा/ली. पानी में धोल बनाकर करें।
3.         बीज दर 30 कि. ग्रा. / एकड
4.         बोनी फर्टीलाइजर कम सीड ड्रिल से करें।
5.         पोषक तत्वों का निर्धारण मृदा परीक्षण आधारित अनुसंशा से करें अथवा औसत नाइट्रोजन 80-100 कि. ग्रा. / हे.फास्फोरस 50-60 किग्रा/हे. एवं पोटाश 30-40 किग्रा/हे. प्रयोग करें।
6.         आवश्यकतानुसार तीन वर्ष में एक बार जिंकसल्फेट 25 किग्रा/हे. प्रयोग करें।
7. बोनी के समय फास्फोरसपोटाश एवं जिंकसल्फेट की संपूर्ण पात्रा आधार खाद के रूप में प्रयोग करें। नाइट्रोजन की 30  मात्रा बोनी के समयशेष मात्रा को दो भागों में बाटकर कल्ले निकलने की अवस्था में एवं पुष्पन अवस्था में प्रयोग करें।
8.         खरपतवार प्रबंधन हेतु बोनी के 20-25 दिन की अवस्था में बिसपायरीबेक सोडियम साल्ट की 100 मिलि/एकड़ व्यापारिक पदार्थ के साथ में मिश्रित दवा मेटसल्फ्यूरान मेथिल $ क्लोरीम्यूरान एथिल की व्यापारिक पदार्थ 8 ग्रा/एकड़ का छिड़काव करें। खरपतवार नाशक दवा के छिड़काव के दौरान मृदा में नमी उपस्थित होना चाहिए।
9.         खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव हेतु फ्लैट फैन या फ्लड जेट नोजन का प्रयोग करें।
10.       लेई पद्धति से बोने हेतु अंकुरित बीजों की बोनी ड्रम सीडर से 30 किग्रा/एकड़ बीज दर का प्रयोग करें।
धान रोपा पद्धति-
1.         धान की रोपण़ी  तैयार करेंरोपण़ी 1 मीटर चैड़ी एवं सुविधानुसार लंबाई की तैयार करेंदो पट्टी के बीच 30 से. मी. गहरी नालियाँ दें जिससे अधिक वर्षा होने पर पानी खेत में एकत्रित न हो एवं आवश्यकता पड़ने पर इन नालियाँ में बैठकर रोपण़ी में खरपतवारों की निदाई सुगमता से की जा सके। रोपण़ी में बेड शय्या में अच्छी पकी गोबर की खाद का प्रयोग करें जिससे रोपाई के दौरान रोपा उखाडने के दौरान जडों को क्षति न पहुँचे।
2.         बीजोपचार पूर्वानुसार ही करें।
3.         सामान्य तौर पर कुछ रोपाई किये जाने वाले क्षेत्र के 20ः क्षेत्र में रोपण़ी हेतु स्थान की आवश्यकता होती है।
4.         प्रयास करें कि धान के रोपा की कम उम्र में रोपाई का कार्य पूरा करलें (15-16 दिन से 25-26 दिन के अंदर)।
5.         पौध अंतरण-  संकर धान में 22 से. मी. कतार से कतार एवं 10 से. मी. पौध से पौध एवं सामान्य किस्म में कतार से कतार 20 से. मी. एवं पौध से पौध 7-8 से. मी.का अंतरण रखें।
6.         रोपा वाले धान में खरपतवार प्रबंधन हेतु बेनसल्फ्यूरान $ प्रेटिलाक्लोर की 4 किग्रा ़ व्यापारिक पदार्थ को प्रति एकड़ की दर से रोपाई के तीन दिन के अंदर प्रयोग करें।
सोयाबीन
1.         बीजोपचार - मैन्कोजेब $ मेटालेक्सिल 3 ग्राम/किग्रा बीज अथवा
           थायमेथाक्साम 30ः एफ. एस. /10 मिलि/किग्रा बीज
                            एवं
राइजोबियम एवं  पी. एस. बी. की (प्रत्येक तरल की 10 मिलि प्रति किग्रा बीज)
2.         बीजदर - छोटे दाने वाली किस्मों हेतु 25 किग्रा/एकड़ एवं बडे़ दाने वाली किस्मों हेतु 30 किग्रा/एकड़
3.         बोने की विधि - रेज्ड बेड प्लाटंर से कूड़ नाली पद्धति से बोनी करें।
4.         अंतरण - कतार से कतार 45 से. मी. तथा पौध से पौध 7.5 से. मी.।
5.         खरपतवार प्रबंधन - प्रोपाक्विजाफाप $ इमेजाथापिर 800 मिलि व्यापारिक पदार्थ को प्रति एकड़ की दर से फसल की बोनी के 20-25 दिन में करें।
मूँग - उड़द
1.        बीजोपचार - सोयाबीन जैसे ही करें।
2.        बीजदर - 6 किग्रा/एकड़
3.        बोनी की विधि - रेज्ड बेड प्लांटर से करें। कतार से कतार की दूरी 30सेमी एवं पौध से पौध की दूरी 7.5 से. मी.
4.        खरपतवार प्रबंधन - इमेजाथापिर की 400 मिलि व्यापारिक पदार्थ प्रति एकड़ की दर से बोनी के 20-25 दिन में छिड़काव करें।
अरहर
1.        बीजोपचार - सोयाबीन जैसे ही करें
2.         बीजदर   -  कम अवधि की किस्मों हेतु 6 किग्रा/एकड़ , लंबी अवधि वाली किस्मों हेतु 4 किग्रा/एकड़
3.         अंतरण - कम अवधि में कतार से कतार की दूरी 45 से. मी. एवं पौध से पौध की दूरी 15 से. मी.
     लंबी अवधि हेतु कतार से कतार की दूर ं75 से. मी. एवं पौध से पौध की दूरी 25 से. मी.
4.                    बोनी की विधि - रेज्ड बेड प्लांटर से करें।
5.        ट्राइकोडर्मा विरडी की 1 ली /एकड़ मात्रा गोबर की खाद में जुताई के उपरांत मिलाकर भूमि उपचार करने से बोनी करें ताकि उकठा रोग का प्रबंधन हो सके। अरहर की खेती मुख्य खेत के साथ मेड़ों पर अवश्य करें
6.        खरपतवार प्रबंधन - इमेजाथापिर की 400 मि.ली. व्यापारिक पदार्थ को प्रति एकड़ की दर से बोनी के 25-25 दिन बाद छिड़काव करें।
            अंतर्वर्तीय फसलें - अरहर एवं उड़द/मूँग 2: 6
             अरहर एवं  सोयाबीन 2: 4
              अरहर एवं मक्का 1: 1
तिल -
1.        बीजोपचार - मैन्कोजेब $ मेटालेक्सिल 3 ग्रा. / किग्रा बीज की दर से बीजोपचार करें।
2.        बीजदर -  2 किग्रा बीज/एकड़ , रेत में मिलाकर बोनी करने से खेत घना नही होगा। पौधे अधिक सघन होने पर उखड़वाकर पौध संख्या 30 से. मी.   10 से. मी. अंतरण में रखें।
3.        जल निकास का समुचित प्रबंधन करें।
4.        उर्वरक मृदा परीक्षण आधारित अनुसंशा करें। अथवा औसत रूप से 40: 30: 20 किग्रा नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटाश का प्रति हेकी दर से प्रयोग करें।
5.        तिलहनी फसल होने के कारण सल्फर 10 किग्रा/एकड़ बोनी के समय प्रयोग करें।
6.        फास्फोरस , पोटाश एवं सल्फर की संपूर्ण मात्रा एवं नाइट्रोजन की एक तिहाई भाग बोनी के समय प्रयोग करें । शेष नाइट्रोजन बोनी के 30 एवं 50 दिन की अवस्था में क्रमशः शाखाएँ बनते समय एवं पुष्पन के दौरान करें।
7.        खरपतवार प्रबंधन - तिल में खरपतवार प्रबंधन हेतु भूमि की तैयारी अच्छे से करें। वारिश शुरू होने पर 10 दिन के अंतराल में तीन बार जुताई करें जिससे खरपतवारों की संख्या में कमी आएगी। फसल की बोनी के तीन दिन के अंदर पेंडिमेथलीन ;38ःद्ध की 700 मिली/एकड़ (व्यावसायिक पदार्थ) की दर से छिड़काव करें । आवश्यकता पड़ने पर फसल की बोनी के 25-30 दिन में एक बार हाथ से निंदाई करें।
कोदो 
1. बीजोपचार - कार्बेन्डाजिम $ मैन्कोजेब 2.5 ग्रा/किग्रा बीज की दर से बीजोपचार करें।
2. बीज दर - 4 किग्रा / एकड़
3. अंतरण - कतार से कतार की दूरी 20 से. मी. एवं पौध से पौध की दूरी  5 से. मी.।
4. पोषक तत्व प्रबंधन - 40: 30: 20 किग्रा. नाइट्रोजन , फास्फोरसपोटाश प्रति हेकी दर से अथवा मृदा परीक्षण के आधार पर करें।
5. खरपतवार प्रबंधन - खेत की तैयारी अच्छी तरह से करेंमानसून आने के बाद 10 दिन के अंतराल पर तीन जुताई करें एवं बोनी के  25 - 30 दिन की अवस्था में एक बार हाथ से निंदाई अवश्य करायें।
फसल सुरक्षा -
1.         सोयाबीन , मूँगउर्द व सब्जियों में रस चूसने वाले कीट एवं इससे फैलने वाले पीला रोग के प्रबन्धन के लिए थायोमेथोक्जाम 3%  एफ.एस. की 10 मिली/किग्रा. बीज या इमिडाक्लोप्रिड 48%  एफ. एस. की 1.25 मिली/किग्रा. बीज को उपचारित करें।
2.         बैगन में तना एवं फल बेधक कीट एवं टमाटर में फलबेधक कीट के प्रबन्धन के लिए जैवकीटनाशी बी. टी. की 1000 ग्राम मात्रा/हेछिडकाव करें।
3.         पर्णकुचंन बीमारी जो टमाटर एवं मिर्च में ज्यादा होती है , की रोकथाम के लिए पौधशाला को एग्रोनेट से ढ़क कर रखें और रोपाई के समय इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एस. एल. की 1 मिली  मात्रा , 2 ली. पानी में मिलाकर रोपाई के 1 घंटे पूर्व जड़ शोधन करें।
4.         जिस खेत में उकठा बीमारी का प्रकोप हो तो वहाँ पर अंतिम जुताई के समय 4-5 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा पकी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट के साथ डाले।
5.         सब्जियों में शुरू की अवस्था में नीम तेल (1500 पी. पी. एम.) की  50-60 मिली प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें।
6.         सोयाबीन में बुवाई के 20-25 दिन बाद यलो स्टिकी टैप (पीली चिपकने वाली पट्टी) 20 की संख्या में प्रति हेमें प्रयोग करने से पीला रोग का प्रकोप कम होता है।
7.         दलहनी एवं तिलहनी फसलों में 2-3 पत्तियों की अवस्था पर थायोमेथोक्जाम + लैम्बडा सायहलोथ्रिन की मिश्रित दवा की 250 - 300 मिली मात्रा प्रति हेकी दर से छिडकाव करें।
8.         फलों में लगने वाले कीटों के प्रबन्धन के लिए थायोमेथाक्जाम + लैम्बडासायहलोथ्रिन की मिश्रित दवा 10 मिली प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
9.         मक्के में लगने वाले फाल आर्मीवर्म के प्रबंधन के लिए स्पानेटोराम 11.7: एस. सी. की 420- 470 मिली या थायोमेथेक्जाम 12.5%+ लैम्बडासायहलोथ्र्रिन 9.5% की मिश्रित दवा 250 मिली/हेकी दर से छिड़़काव करें।
उद्यानिकी -
1.        सब्जी की रोपणी  तैयार करने के लिए सतह से लगभग 6 से 9 इंच ऊँची (रेज्ड बेड) भूमि का सोलराइजेशनपन्नी से ढंक कर करें।  सब्जियों के खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था करें। यह समय आम और अमरूद के पौधों के रोपण के लिए उपयुक्त है। 
2.        फलों के पौधों में खाद एवं उर्वरकों की मात्रा पौधों की उम्र के अनुसार डालें।
3.        टमाटरबैगनमिर्च एवं अगेती फूल गोभी की पौध की खेत में रोपाई कर हल्की सी सिचाईं करें।
4.        खेत में प्रारभिंक उर्वरक डाल कर कद्दू वर्गीय सब्जियों की बुवाई करें।
पशुपालन-
1.         हरे चारे हेतु चरीज्वारमक्का बोएं।
2.        बकरी वर्ग में पी. पी. आर. का टीका करण करें।
3.        पशुबाडे की मरम्मत करें।
अन्य 
1.       विषैले  जन्तु के काटने पर प्राथमिक उपचार के फौरन बाद डाक्टर के पास जाएँ।
2.      पानी को उबाल कर , छान कर ठंडा करके पिएँ। छानने के लिए दो परतों वाले कपडे का प्रयोग करें।
3.      दही एवं खमीरयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन ना करें।
4.      वर्षा से बचने के लिए पेड़ के नीचे शरण ना लें।


Wednesday, 5 February 2020

आलू की समस्या का समाधान

प्रश्न: आलू मे ये पाला है या कोई रोग कृपया मार्गदर्शन करें?
उत्तर::पछेती अंगमारी रोग लग रहा है Metalaxy+Mancozeb का स्प्रे करे 2.5 gm/ lit.

Monday, 27 August 2018

उड़द की बैगनी पत्तियाँ

प्रश्न: उड़द की पत्तियाँ बैंगिनी रंग की हो रही हैं। कृपया उपाय बतायें ?
उत्तर: मैनकोज़ैब+कार्बेन्डाज़िम मिश्रित दवा की 35 ग्राम मात्रा प्रति टंकी छिडकाव करें। प्रति एकड़ 15 से 20 टंकी दवा के घोल।का छिड़काव करें - सादर ।

Thursday, 16 August 2018

उड़द में पीला मोज़ैक का नियंत्रण

प्रश्न:उड़द मे पीला मोजेक लगा है कृपया उपचार  बतायेें ?
उत्तर: थायोमैथाकज़ाम एवं लैमडासायहैलोथ्रिन मिश्रित दवा 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलें और प्रति एकड़ 200 लीटर घोल का छिड़काव करें जिससे सफेद मक्खी का नियंत्रण होगा जो पीला मोज़ैक फैलाती हैं।
पीला मोज़ैक, वायरस के कारण फैलता है इसे रोक पाना मुश्किल है अतः इसे फैलाने वाली सफेद मक्खी को नियंत्रित किया जाता है।
जिन पौधों में पीला मोज़ैक लग चुका है उन पौधों को जड़ से उखाड़ कर प्लास्टिक के बोरे में डाल कर , बोरे का मुँह बंद कर खेत से बाहर ला कर जला दें अथवा ज़मीन में दबा दें -सादर 💐💐

Sunday, 12 August 2018

उडद की पत्तियों में छेद तथा पत्तियाँ उल्टी होने का नियंत्रण

प्रश्न: उड़द की पत्तियाँ उल्टी हो रही हैं तथा पत्तों में छेद भी हो रहे हैं, कृपया उपाय बताने का कष्ट करें ? 
उत्तर: इंडॉक्सकार्ब नामक कीटनाशक का छिड़काव 15 मिलीमीटर प्रति टंकी के हिसाब से करें जिससे कीट की समस्या का समाधान होगा एवं साथ ही कार्बेंडाज़िम तथा मैंकोज़ैब की मिश्रित फफूँदनाशक दवाई मिश्रण का 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करें जिससे उसमें होने वाले रोग की समस्या का बचाव होगा।

Tuesday, 7 August 2018

टमाटर के पौधे में मच्छर तथा रोग नियंत्रण

प्रश्न: टमाटर के पौधों की पत्तियाँ काली पड़ रही है तथा पत्तियों में छेद हो रहे हैं,  मच्छर भी दिख रहे हैं, कृपया उपाय बतायें ?
उत्तर: टमाटर के पौधों में लैम्डासायहैलोथ्रिन एवं थायमिथॉक्ज़ाम की मिश्रित दवा 5 मिलीलीटर प्रति टंकी की दर से प्रति एकड़ 15 से 20 टंकी दवा के घोल का छिड़काव करें लगभग 6 से 7 दिन बाद मैटालैक्सिल और मैंकोज़ैब की मिश्रित दवा 35 ग्राम प्रति टंकी पानी मे घोलकर, प्रति एकड़ 15 से 20 टंकी दवा के घोल का छिड़काव करें।